शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ असुरान्तक चक्राय स्वाहा – कवचाय हुं
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपकवच-न्यास / असुरान्तक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
असुरों का अंत करने वाले चक्र को स्वाहा, वे मेरा कवच बनें। (बाह्य आक्रमणों से अभेद्य सुरक्षा)।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कालीयफणिमाणिक्यरञ्जितश्रीपदाम्बुजाय नमः
ॐ पादतलं गोपी पातु।
ॐ कबन्धराशिमध्यगायै नमः
रक्तो रक्ताङ्गरागां शुक कुसुमायुत तुन्दिलश्चन्द्रमौलिः नेत्रैर्युक्तस्त्रिभिर्वामनकरचरणो बीजपूरं दधानः । हस्ताग्रक्लृप्त पाशाङ्कुश शरवरदो नागवक्त्रो हि भूषो देवः पद्मासनस्थो भवतु सुखकरो भूतये विघ्नराजः ॥
ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥
ॐ प्रभवे नमः।