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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

संहार भैरव मंत्र (उत्तर-पूर्व दिशा)

ॐ नमो भगवते संहार भैरवाय भूत प्रेत पिशाच ब्रह्म राक्षसान् उच्चाटय उच्चाटय संहारय संहारय सर्व भय छेदनं कुरु कुरु स्वाहा।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारमहा-उग्र अष्टभैरव मंत्र
स्वरूपसंहार भैरव
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हे संहार भैरव, सभी भूतों-राक्षसों का उच्चाटन व संहार करें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

पूर्व जन्म के बुरे कर्मों का शमन, प्रेत-बाधा का उच्चाटन

विस्तृत लाभ

पूर्व जन्म के बुरे कर्मों का शमन, प्रेत-बाधा का उच्चाटन 25।

जप काल

श्वान वाहन का ध्यान करते हुए ईशान कोण में 1008 बार तांत्रिक जप 26।

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