शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ जगद्व्यापिने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपसर्वव्यापक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो इस पूरे ब्रह्मांड के अणु-अणु में व्याप्त हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
किसी भी जीव से घृणा न करने का भाव
02
संकीर्णताओं से पूर्ण मुक्ति
विस्तृत लाभ
किसी भी जीव से घृणा न करने का भाव; संकीर्णताओं से पूर्ण मुक्ति।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सिद्धाय नमः।
ॐ रमायै नमः
यः पुस्तकाक्षगुण दण्डकमण्डलु श्रीर्निर्वृत्यमान करभूषणमिन्दुवर्णम् । स्तम्बेरमानन चतुष्टय शोभमानं त्वां संस्मरे द्विजगणाधिपते धन्यः ॥
ॐ वर्णाश्रमगुरवे नमः
ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयम् कारी वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा।
ॐ तत्सत् भूर्भुवः स्वः तस्मै परब्रह्मणे नमः (गोपाल-तापनी में विभिन्न वर्णनों के साथ प्रयुक्त)