शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ कण्ठं मे पातु नृहरिर्भूभृदनन्तकोटनः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपकण्ठ (गला) / नृहरि
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
संपूर्ण पृथ्वी को धारण करने वाले नृहरि मेरे कण्ठ की रक्षा करें। (श्वास व स्वर दोषों का निवारण)।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ योगिनांपतये नमः
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
ॐ काशीशवरदायिन्यै नमः
ॐ हासमुख्यै नमः
ॐ प्राणदाय नमः
ॐ स्मृतये नमः