शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ मूलप्रकृत्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो ब्रह्मांड की आदि और मूल स्त्री-ऊर्जा (शक्ति) हैं।
जप काल
तुलसी माला पर जप।
टिप्पणी
साधना की दृष्टि से इन नामों को ॐ और 'नमः' या 'स्वाहा' के सम्पुट के साथ जपा जाता है।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: होठों और उच्चारण स्थान की रक्षा | अर्थ: विद्या की अधिष्ठात्री देवी मेरे होंठों की सदा रक्षा करें) 8
ॐ दामोदराय विद्महे रुक्मिणीवल्लभाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्।
ॐ यज्ञभोक्त्रे नमः
ॐ सुमुख्यै नमः
ॐ ह्रां ह्रीं हुं समस्त ग्रह दोष विनाशाय ॐ
ॐ वरेण्याय नमः