शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ श्रीमती नेत्रयुगलं पातु।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकाररक्षा कवच मंत्र;
स्वरूपश्रीमती
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
श्रीमती मेरे दोनों नेत्रों की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंग: दोनों नेत्रों की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: दोनों नेत्रों की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
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ॐ ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं नमः।
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य। प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥ 18
ॐ राम रामाय नमः