शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ रक्षोविध्वंसकारकाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपराक्षस-संहारक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
आसुरी प्रवृत्तियों और राक्षसों का संहार करने वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
पूर्वे असितांग भैरवाय नमः पूर्वे मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
सद्योजातं प्रपद्यामि सद्योजाताय वै नमो नमः। भवे भवे नातिभवे भवस्व मां भवोद्भवाय नमः॥
कृपां कुरु जगन्मातर्मामेवं हततेजसम्। गुरुशापात्स्मृतिभ्रष्टं विद्याहीनं च दुःखितम्॥
ॐ नमः कालाय काल द्रष्ट्राय कराल वदनाय च
ॐ कङ्कालमाल्यधारिण्यै नमः
ॐ सुरूपाय नमः