शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ रविचन्द्राग्निलोचनाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपत्रिनेत्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सूर्य, चंद्र और अग्नि रूपी नेत्र वाले भगवान को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
भूत, वर्तमान और भविष्य को देखने की सूक्ष्म दृष्टि
विस्तृत लाभ
भूत, वर्तमान और भविष्य को देखने की सूक्ष्म दृष्टि।
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ॐ मन्त्रगध्यायै नमः
ॐ मोहनाय नमः।
अत्रोपविश्य लक्ष्मि! त्वं स्थिरा भव हिरण्मयि! सुस्थिरा भव सुप्रीत्या प्रसन्नवरदा भव॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये चन्द्रः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
मया सो अन्नमत्ति यो विपश्यति यः प्राणिति य ईं शृणोत्युक्तम्। अमन्तवो मां त उप क्षियन्ति श्रुधि श्रुत श्रद्धिवं ते वदामि॥
ॐ सर्वयन्त्रात्मकाय नमः