शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ समाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपसमदर्शी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सभी प्राणियों के प्रति समभाव (समान दृष्टि) रखते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
समभाव
विस्तृत लाभ
समभाव
जप काल
ध्यान
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं आपदुद्धारणाय ह्रां ह्रीं ह्रूं अजामिलबद्धाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षणभैरवाय मम दारिद्र्य विद्वेषणाय महाभैरवाय नमः श्रीं ह्रीं ऐं।
ॐ महाज्वालाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥
ॐ वाङ्मे मनसि प्रतिष्ठिता मनो मे वाचि प्रतिष्ठितम् आविरावीर्म एधि॥
ॐ श्यामकन्धराय नमः
ॐ सर्वविद्याधिपः पातु नृसिंहो रसनां मम
अहं रुद्राय धनुरातनोमि ब्रह्मद्विषे शरवे हन्तवा उ। अहं जनाय समदं कृणोम्यहं द्यावापृथिवी आ विवेश॥