माँ लक्ष्मी मंत्र
ॐ सर्वावगुणवर्जिताय नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो काम, क्रोध, लोभ आदि समस्त सांसारिक दोषों और अवगुणों से सर्वथा मुक्त हैं 35।
इस मंत्र से क्या होगा?
इन 108 मंत्रों का शृंखलाबद्ध पाठ शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है
दरिद्रता व नकारात्मकता का नाश करता है
और अंततः वैकुण्ठ की प्राप्ति सुनिश्चित करता है
विस्तृत लाभ
इन 108 मंत्रों का शृंखलाबद्ध पाठ शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है; दरिद्रता व नकारात्मकता का नाश करता है; और अंततः वैकुण्ठ की प्राप्ति सुनिश्चित करता है।
जप काल
नित्य प्रातः या गोधूलि वेला में, तुलसी या रुद्राक्ष की माला से अनुष्ठानिक पाठ।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वेदान्तवेदिन्यै नमः
श्रीहरिः पातु ते वक्त्रं मस्तकं मधुसूदनः । श्रीकृष्णश्चक्षुषी पातु नासिकां राधिकापतिः ॥
ॐ सर्वलोकरिमर्दनाय नमः
ॐ वाण्यै नमः
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं सर्व मङ्गलाय पिङ्गलाय ॐ नमः
ॐ गुरुजी को आदेश गुरुजी को प्रणाम, धरती माता धरती पिता, धरती धरे ना धीर बाजे श्रृंगी बाजे तुरतुरी आया गोरखनाथ मीन का पूत मुंज का छड़ा लोहे का कड़ा हमारी पीठ पीछे यती हनुमंत खड़ा, शब्द सांचा पिंड काचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।