ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

माँ लक्ष्मी मंत्र

तद्विष्णोः परमं पदं सदा पश्यन्ति सूरयः। दिवीव चक्षुराततम्॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारवैदिक मंत्र / विष्णु सूक्त
स्वरूपसर्वव्यापी विष्णु
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

ज्ञानी और देवगण भगवान विष्णु के उस परम पद के सदा दर्शन करते हैं, जो आकाश में फैले हुए नेत्र के समान सर्वव्यापी है।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

सर्वोच्च आध्यात्मिक सत्य की प्राप्ति और ब्रह्मांडीय चेतना का ज्ञान

विस्तृत लाभ

सर्वोच्च आध्यात्मिक सत्य की प्राप्ति और ब्रह्मांडीय चेतना का ज्ञान।

जप काल

वैदिक देव-पूजन, यज्ञ या देव-प्रतिष्ठा के समय 4।

इसे भी पढ़ें

अन्य देवताओं के मंत्र

प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र