शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
तत्पुरुष मंत्र (पूर्व मुख)
तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि। तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारपंचब्रह्म / गायत्री मंत्र
स्वरूपतत्पुरुष शिव (माया को आवृत करने वाले, वायु तत्त्व)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हम उस महान पुरुष को जानते हैं, उस महादेव का ध्यान करते हैं। वह रुद्र देव हमारी बुद्धि को सत्य मार्ग पर प्रेरित करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अज्ञान का आवरण हटना, आत्म-ज्ञान की प्राप्ति और प्राण वायु का संतुलन
विस्तृत लाभ
अज्ञान का आवरण हटना, आत्म-ज्ञान की प्राप्ति और प्राण वायु का संतुलन 21।
जप काल
पूर्व दिशा की ओर मुख करके।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सन्मुखाय नमः
ध्यायेच्च तामस क्षत्र रुधिर रक्त परश्वधम्। रक्त नेत्रं करस्थं ब्रह्म सूत्रं यम प्रभम्॥
ॐ कलाधराय नमः
शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम्।
अनेकमन्त्रनादमञ्जुनूपुरारवस्खलत्समाजराजहंसवंशणिक्वाणातिगौरवे। विलोलहेमवल्लरीविडम्बिवारुचङ्क्रमे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ सुरार्चिताय नमः