षण्मुख कवचम्
अण्डमाय अवनी आहि अरीयोणप् पोरुळ ताहि
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो ब्रह्मांड और पृथ्वी रूप में व्याप्त हैं, वे कैलास के पुत्र मेरे माथे की रक्षा करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
मानसिक और शारीरिक रोगों से रक्षा
विस्तृत लाभ
मानसिक और शारीरिक रोगों से रक्षा।
जप काल
रोग या शत्रु भय के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सर्वदुःखहराय नमः
ॐ सुभाषिण्यै नमः
श्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा वक्षः सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: हृदय व वक्ष-स्थल की रक्षा | अर्थ: विद्या देवी मेरे वक्ष की रक्षा करें) 8
दयासुदृष्टिं कुरुतां मयि श्रीः! सुवर्णदृष्टिं कुरु मे गृहे श्रीः॥
ॐ क्षेत्रज्ञाय नमः।
वीणां कल्पलतां अरिं च वरदं दक्षे विदत्ते करैः वामे तामरसं च रत्नकलशं सन्मञ्जरीं चाभयम् । शुण्डादण्ड लसन्मृगेन्द्रवदनः शङ्खेन्दुगौरः शुभो दीव्यद्रत्ननिभांशुकः गणपतिः पायादपायात्स नः ॥