शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ अशोकवनिकाच्छेत्रे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपवन-विध्वंसक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
रावण की अशोक वाटिका को नष्ट-भ्रष्ट करने वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ पद्मनिलयायै नमः
विष्णवे जिष्णवे महाविष्णवे प्रविष्णवे महेश्वराय
ॐ कृष्णाय नमः
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
सूक्ष्मातिसूक्ष्मं कलिलस्य मध्ये विश्वस्य स्रष्टारमनेकरूपम्
ॐ दान्ताय नमः