शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
पंचकूट (षड-बीजात्मक) महामंत्र
ॐ ह्स्फ्रेँ ख्फ्रेँ ह्स्रौँ ह्स्ख्फ्रेँ ह्सौँ हनुमते नमः॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारपंचकूट तांत्रिक अस्त्र मंत्र
स्वरूपएकादशाक्षर (11 अक्षरी) मारुति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
(यह पाँच कूट बीजाक्षरों का समूह है जो हनुमान जी की अतींद्रिय शक्तियों को ब्रह्मांडीय नाद के रूप में प्रकट करता है।)
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
यह मंत्र महोदधि का अत्यंत गुह्य मंत्र है
02
यह सभी प्रकार के तंत्र-मंत्र को काटने और महा-सिद्धियों को जाग्रत करने में सक्षम है
विस्तृत लाभ
यह मंत्र महोदधि का अत्यंत गुह्य मंत्र है। यह सभी प्रकार के तंत्र-मंत्र को काटने और महा-सिद्धियों को जाग्रत करने में सक्षम है 11।
जप काल
इसका विनियोग (Viniyoga) रामचन्द्र ऋषि और गायत्री छंद के साथ होता है। षडंग-न्यास के बिना इसका जप वर्जित है।
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