शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ सहस्रशीर्षा पुरुषः पातु मे सर्वशस्तनुम्
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपसंपूर्ण शरीर / विराट पुरुष
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सहस्रों सिरों वाले विराट पुरुष मेरे संपूर्ण शरीर की सब प्रकार से रक्षा करें। (सर्वांगीण सुरक्षा कवच)।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वतः। (स्वरूप: ह्रीं-स्वरूपा सरस्वती | लाभ: मस्तिष्क और सहस्रार चक्र की सभी दिशाओं से रक्षा | अर्थ: ह्रीं बीज रूपी सरस्वती मेरे सिर की सब ओर से रक्षा करें) 8
ॐ हरिप्रिया नासिकां पातु।
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये अन्तश्चेतनात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो घोरघोरतरीभ्यश्च। सर्वतः शर्व सर्वेभ्यो नमस्ते रुद्ररूपेभ्यः॥
ॐ महाद्रिधृके नमः
ॐ शिखिवाहनाय नमः