नृसिंह मंत्र
ॐ जगद्व्यापिने नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो इस पूरे ब्रह्मांड के अणु-अणु में व्याप्त हैं, उन्हें नमस्कार है।
इस मंत्र से क्या होगा?
किसी भी जीव से घृणा न करने का भाव
संकीर्णताओं से पूर्ण मुक्ति
विस्तृत लाभ
किसी भी जीव से घृणा न करने का भाव; संकीर्णताओं से पूर्ण मुक्ति।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
गजेन्द्रवदनं साक्षाच्चलकर्ण सुचामरम् । हेमवर्णं चतुर्बाहुं पाशाङ्कुशधरं वरम् ॥ स्वदन्तं दक्षिणे हस्ते सव्ये त्वाम्रफलं तथा । पुष्करे मोदकं चैव धारयन्तमनुस्मरेत् ॥
बुद्धिविच्छिन्नचैतन्यमेकं पूर्णमथापरम्। आभासत्वपरं बिम्बभूतमेवं त्रिधा चितिः॥
ॐ कञ्जलोचनाय नमः
ॐ श्रीं ह्रीं ब्राह्म्यै स्वाहेति दन्तपङ्क्तीः सदाऽवतु। (स्वरूप: ब्राह्मी | लाभ: दाँतों और स्पष्ट वाचन-स्थान की रक्षा | अर्थ: ब्राह्मी देवी मेरी दंत-पंक्तियों की सदा रक्षा करें) 8
ॐ अखिलाद्याय नमः
ॐ कारणोपात्तदेहाय नमः