शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ जाम्बवत्प्रीतिवर्धनाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपजाम्बवान-सखा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
वृद्ध जाम्बवान के हृदय में अपने प्रति अपार प्रेम और सम्मान बढ़ाने वाले।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सर्वयोगविनिःसृताय नमः
वृत्तोत्फुल्लविशालाक्षं विपक्षक्षयदीक्षितम्। निनादत्रस्तविश्वाण्डं विष्णुमुग्रं नमाम्यहम्॥
ॐ हींकार्यै नमः
कृषिश्च मे वृष्टिश्च मे जैत्रं च मे औद्भिदं च मे...
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्माकं दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ।
ॐ कलाकाष्ठातनवे नमः।