शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ जानुदेशं जया पातु।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकाररक्षा कवच मंत्र;
स्वरूपजया
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जया देवी मेरे घुटनों की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंग: जानु (घुटनों) की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: जानु (घुटनों) की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ऐमित्येकाक्षरो मन्त्रो मम कण्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: एकाक्षरी बीज | लाभ: कंठ, स्वर-तंत्र और विशुद्धि चक्र की रक्षा, संगीतकारों के लिए अति उत्तम | अर्थ: 'ऐं' रूपी एकाक्षर मन्त्र मेरे कंठ की सदा रक्षा करे) 8
प्रतीच्यां उन्मत्त भैरवाय नमः प्रतीच्यां मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ जगद्रथाय नमः
ॐ क्षीरसागरवासिन्यै नमः
ॐ कदलीफलमानसायै नमः
पवन तनय बल पवन समाना। बुधि बिबेक बिग्यान निधाना॥