अग्नि जिह्वा मंत्र
काली कराली च मनोजवा च सुलोहिता या च सुधूम्रवर्णा। स्फुलिङ्गिनी विश्वरुची च देवी लेलायमाना इति सप्त जिह्वाः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
काली, कराली, मनोजवा, सुलोहिता, सुधूम्रवर्णा, स्फुलिंगिनी और विश्वरुची—ये अग्नि की सात चंचल और प्रज्ज्वलित जिह्वाएं हैं जो हव्य को ग्रसती हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
अज्ञानता के आवरण का नाश
विस्तृत लाभ
अज्ञानता के आवरण का नाश।
जप काल
यज्ञ या अग्निहोत्र साधना के समय आहुति से पूर्व ध्यान हेतु।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
जो महर्षि भृगु के पवित्र वंश को आनंदित करने वाले हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: कुल-गोत्र की वृद्धि) 19।
ॐ मङ्गलदाय नमः
अहमेव वात इव प्र वाम्यारभमाणा भुवनानि विश्वा। परो दिवा पर एना पृथिव्यैतावती महिना सम्बभूव॥
ॐ नारायणाय नमः (पाञ्चरात्र दीक्षा)
भव भेषज रघुनाथ जसु सुनहिं जे नर अरु नारि। तिन्ह कर सकल मनोरथ सिद्ध करहिं त्रिसिरारि॥
ॐ ह्रीं वाग्वादिन्यै स्वाहा नासां मे सर्वतोऽवतु। (स्वरूप: वाग्वादिनी | लाभ: प्राण-वायु और नासिका की रक्षा | अर्थ: वाग्वादिनी नासिका की सभी प्रकार से रक्षा करें) 8