ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

महोग्र नरसिंह दिग्बंधन मंत्र

ॐ नमो भगवते महोग्र दिग्बन्धन नरसिंहाय ज्वालामुखाय अग्निनेत्राय... हन हन दह दह पच पच बन्ध बन्ध कील कील स्वाहा

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारतांत्रिक दिग्बंधन मंत्र
स्वरूपमहोग्र रूप
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हे महोग्र दिग्बंधन नरसिंह, जिनके मुख और नेत्र अग्नि के समान हैं... मेरे शत्रुओं का हनन करें, उन्हें भस्म करें, सभी दिशाओं को मेरे लिए बांधें और कीलित करें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

सभी दसों दिशाओं से नकारात्मक शक्तियों (पर-तंत्र, पर-यंत्र, भूत-प्रेत) को कीलित करना

विस्तृत लाभ

सभी दसों दिशाओं से नकारात्मक शक्तियों (पर-तंत्र, पर-यंत्र, भूत-प्रेत) को कीलित करना।

जप काल

किसी भी बड़ी साधना से पूर्व दिशा-बंधन हेतु तांत्रिक प्रयोग।

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