शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ निर्गुणाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
स्वरूपनिर्गुण ब्रह्म
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो त्रिगुणमयी माया (सत्त्व, रज, तम) के गुणों से पूर्णतः परे हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मायातीत अवस्था
02
सांसारिक आकर्षणों से निर्लिप्त रहकर जीवन जीने की कला
विस्तृत लाभ
मायातीत अवस्था; सांसारिक आकर्षणों से निर्लिप्त रहकर जीवन जीने की कला।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अनङ्गरङ्गमङ्गलप्रसङ्गभङ्गुरभ्रुवां सविभ्रमससम्भ्रमदृगन्तबाणपातनैः। निरन्तरं वशीकृतप्रतीतनन्दनन्दने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ गोपीकरावलाम्बिने नमः
ॐ संकर्षणाय नमः
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
ॐ गं ग्लौं श्रौं ग्लौं गं ॐ नमः
घोर रूपे महारावे सर्वशत्रु भयङ्करि। भक्तेभ्यो वरदे देवि त्राहि मां शरणागतम्॥