नृसिंह (नरसिंह) गायत्री मंत्र
ॐ नरसिंहाय विद्महे वज्रनखाय धीमहि तन्नो नरसिंहः प्रचोदयात्।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हम वज्र के समान नखों वाले भगवान नरसिंह का ध्यान करते हैं; वे हमारी रक्षा करते हुए हमें प्रेरित करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
साहस, वीरता की वृद्धि और अचानक आने वाले अज्ञात भय का नाश
विस्तृत लाभ
साहस, वीरता की वृद्धि और अचानक आने वाले अज्ञात भय का नाश 11।
जप काल
सायं गोधूलि वेला।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ योगिने नमः
अङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम्। अङ्गीकृताखिलविभूतिरपाङ्गलीला माङ्गल्यदास्तु मम मङ्गलदेवतायाः॥
ॐ ऐं क्लीं सौः।
अनङ्गरङ्गमङ्गलप्रसङ्गभङ्गुरभ्रुवां सविभ्रमससम्भ्रमदृगन्तबाणपातनैः। निरन्तरं वशीकृतप्रतीतनन्दनन्दने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
वेल् वेल् वेत्रिवेल् मुरुगनुक्कु अरोहरा
योगारूढो योगपट्टाभिरामः बालार्कभाश्च नीलांगशुकः । पाशेक्ष्वाक्षान् योगदण्डं दधानः पायान्नित्यं योगविघ्नेश्वरः नः ॥