शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ रत्नकुण्डलदीप्तिमते नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपकुंडल-धारक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
रत्नों से जड़े दिव्य कुण्डलों से दीप्तिमान भगवान को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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ॐ शम्भवे नमः
ॐ कंसारये नमः
यं यं कामयते कामं तं तं प्राप्नोति साधकः। राधाकृपाकटाक्षेण भक्तिः स्यात् प्रेमलक्षणा॥
ॐ धर्माध्यक्षाय नमः
ॐ महा काल्यै च विद्महे श्मशान वासिन्यै च धीमहि तन्नो काली प्रचोदयात
जिन्होंने धर्म-विरोधी आतातायी क्षत्रियों पर विजय प्राप्त की, उन्हें नमस्कार। (लाभ: प्रतिस्पर्धियों पर विजय) 19।