शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ स्तम्भजाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपस्तम्भ-नरसिंह
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो जड़ खंभे को चीरकर प्रकट हुए, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
असंभव प्रतीत होने वाले कार्यों का सिद्ध होना
02
भौतिक नियमों से परे ईश्वरीय सहायता
विस्तृत लाभ
असंभव प्रतीत होने वाले कार्यों का सिद्ध होना; भौतिक नियमों से परे ईश्वरीय सहायता।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
कामदेवाय सर्वजनप्रियाय सर्वजनसम्मोहनाय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल सर्वजनस्य हृदयं मे वशं कुरु कुरु स्वाहा ॥
ॐ यज्ञरूपाय नमः
व्यक्ताव्यक्तगिरः सर्वे वेदाद्या व्याहरन्ति याम्। सर्वकामदुघा धेनुः सा मां पातु सरस्वती॥ सौः देवीं वाचमजनयन्त देवास्ता विश्वरूपाः पशवो वदन्ति। सा नो मन्द्रेषमूर्जं दुहाना धेनुर्वागस्मानुपसुष्टुतैतु॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये देवासुरमनुष्यबोधः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ ब्रह्मचारिणे नमः
ॐ दुर्गमज्ञानदायै नमः