जयदेव कृत दशावतार नृसिंह स्तुति
तव करकमलवरे नखमद्भुतशृंगं दलितहिरण्यकशिपुतनुभृंगम्। केशव धृतनरहरिरूप जय जगदीश हरे॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे नरहरि रूप धारण करने वाले केशव! आपके कर-कमलों के अद्भुत नखों ने हिरण्यकशिपु रूपी भँवरे को कुचल दिया है। हे जगदीश्वर हरि! आपकी जय हो।
इस मंत्र से क्या होगा?
हरिभक्ति और प्रभु के प्रति अनन्य प्रेम का जागरण
पापों का शमन
विस्तृत लाभ
हरिभक्ति और प्रभु के प्रति अनन्य प्रेम का जागरण। पापों का शमन।
जप काल
कीर्तन के समय या भगवान के शृंगार दर्शन के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ लीलामानुषविग्रहाय नमः
कर्दमेन प्रजाभूता मयि सम्भव कर्दम। श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम्॥
हरि राम हरि राम, राम राम हरि हरि (Hari Ram Hari Ram, Rama Rama Hari Hari)
ॐ पद्मनाभसहोदर्यै नमः
ॐ ह्रीं श्रीं त्र्यक्षरो मन्त्रो नैर्ऋत्यां मे सदाऽवतु। (अर्थ: त्र्यक्षरी मन्त्र नैऋत्य कोण में रक्षा करे) 8
ॐ स्फुरत्स्मेराम्बुजेक्षणायै नमः