शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ उदारकीर्तये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपयशस्वी रूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनकी कीर्ति (यश) अत्यंत उदार, व्यापक और ब्रह्मांड में फैली है, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
समाज में बेदाग यश, कीर्ति और उच्च कोटि के सम्मान की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
समाज में बेदाग यश, कीर्ति और उच्च कोटि के सम्मान की प्राप्ति।
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पाँचों त्रिशेम चलें, लांगुरिया सलार चलें। भीम की गदा चले, हनुमान की हाँक चले। नाहर की धाक चलै, नहीं चलै, तो हजरत सुलेमान के तखत की दुहाई है। एक लाख अस्सी हजार पीर व पैगम्बरों की दुहाई है। चलो मन्त्र, ईश्वर वाचा। गुरु का शब्द साँचा।
ॐ विपुलांसाय नमः
या या मनसि वै यस्य विभूतिः प्रतिभाति च। तां तां ददाति तस्याशु धनधान्यगवादिकाम्॥
ॐ सौदामिन्यै नमः
ॐ सर्वकूटशरीरिण्यै नमः
ॐ इच्छामय्यै नमः