शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ वक्त्रं पात्विन्दुवदनं सदा प्रह्लादवन्दितः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपमुख / प्रह्लाद-वरद
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
प्रह्लाद द्वारा वन्दित, चंद्र-समान मुख वाले प्रभु मेरे मुख की रक्षा करें। (मुखमंडल पर तेज वृद्धि)।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ नीललोहिताय नमः
ॐ कूर्चबीजजपप्रीतायै नमः
ॐ इन्द्राय नमः
ॐ ह्रः ॐ सौं ॐ वैं ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीजयजय चण्डिकायै नमः। ॐ स्वीं स्वीं विध्वंसय विध्वंसय ॐ प्लूं प्लूं प्लावय प्लावय... (अति विस्तृत तांत्रिक शृंखला)... ॐ चामुण्डायै विच्चे स्वाहा। मम सकल मनोरथं देहि देहि, सर्वोपद्रवं निवारय निवारय... भञ्जय भञ्जय ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं स्वाहा॥
ॐ कुञ्जविहारिण्यै नमः
ॐ प्रजापतये नमः