ऋण-विमोचन नरसिंह मंत्र
ॐ वेदवेदान्तयज्ञेशं ब्रह्मरुद्रादिवन्दितम्। श्रीनृसिंहं महावीरं नमामि ऋणमुक्तये॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो वेद, वेदांत और यज्ञों के स्वामी हैं, जिनकी ब्रह्मा-रुद्र आदि वंदना करते हैं, उन महावीर श्री नरसिंह को मैं ऋण-मुक्ति हेतु नमस्कार करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
घोर दरिद्रता, पूर्व जन्म के कर्म-ऋण, पितृ-ऋण और सांसारिक कर्जों से अचूक मुक्ति
विस्तृत लाभ
घोर दरिद्रता, पूर्व जन्म के कर्म-ऋण, पितृ-ऋण और सांसारिक कर्जों से अचूक मुक्ति।
जप काल
प्रदोष काल में या नित्य गोधूलि वेला में ऋणमोचन स्तोत्र का पाठ।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
तब जनक पाइ बसिष्ठ आयसु ब्याह साजि सँवारि कै। मांडवी श्रुतकीरति उरमिला कुँअरि लईं हँकारि कै॥
ॐ सोमनन्दनाय नमः
ॐ स्वयम्भुवे नमः
ॐ मायिने नमः
ॐ बालार्कसदृशाननाय नमः
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ॥