शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ वरप्रदाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपप्रह्लाद-वरद
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो अपने योग्य भक्तों को वरदान देने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
साधक की सभी सात्विक और मनोवांछित इच्छाओं की पूर्ति
विस्तृत लाभ
साधक की सभी सात्विक और मनोवांछित इच्छाओं की पूर्ति।
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ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ॥
ॐ सर्वदोषनिषूदिन्यै नमः
ॐ कबन्धगृहमध्यस्थायै नमः
ॐ गुणाकराय नमः
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी। तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥
ॐ कीर्त्यै नमः।