शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ विकरालाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपकराल स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनका मुख सर्वग्रासी और अत्यंत विकराल है, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
जीवन पर छाए हुए व्यापक और चौतरफा संकटों को एक साथ निगलने हेतु
विस्तृत लाभ
जीवन पर छाए हुए व्यापक और चौतरफा संकटों को एक साथ निगलने हेतु।
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ॐ जगन्नाथाय नमः
अहं सुवे पितरमस्य मूर्धन् मम योनिरप्स्वन्तः समुद्रे। ततो वि तिष्ठे भुवनानु विश्वोतामूं द्यां वर्ष्मणोप स्पृशामि॥
ॐ अनघाय नमः
अभयवरदहस्तः पाशदन्ताक्षमाला सृणिपरशुदधानो मुद्गरं मोदकं च । फलमधिगत सिंहः पञ्चमातङ्गवक्त्रो गणपतिरतिगौरः पातु हेरम्बनामः ॥
कवचस्यास्य जापी तु ब्रह्मज्ञानं च विन्दति। इत्येतदुक्तं कवचं मया हैहयविद्विषः॥