शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ वत्सवाटचराय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपगोपाल
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
बछड़ों के बाड़े में विचरण करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
जीव-जन्तुओं से प्रेम
विस्तृत लाभ
जीव-जन्तुओं से प्रेम
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वरदहस्ताय नमः
ॐ कृष्णसून्मादिन्यै नमः
ॐ करवालमयीकर्मायै नमः
ॐ श्रीं ह्रीं पातु मे ग्रीवां स्कन्धं मे श्रीं सदाऽवतु। (स्वरूप: श्रीं ह्रीं स्वरूपा | लाभ: गर्दन और कंधों की रक्षा | अर्थ: देवी मेरी ग्रीवा और स्कंध की रक्षा करें) 8
ॐ भूतपाय नमः।
आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे। नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले॥