शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
नृसिंह मंत्र
ॐ यशस्कर्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपयशस्करी
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अकलंक यश और कीर्ति का चारों दिशाओं में फैलना
विस्तृत लाभ
अकलंक यश और कीर्ति का चारों दिशाओं में फैलना
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ नमो सिद्धिविनायकाय सर्वकार्यकर्त्रे सर्वविघ्नप्रशमनाय सर्वराज्यवश्यकरणाय सर्वजनसर्वस्त्रीपुरुषाकर्षणाय श्रीं ॐ स्वाहा ॥
ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते॥
ॐ मुष्टिकासुरचाणूरमल्लयुद्धविशारदाय नमः
ॐ गुणश्रेष्ठाय नमः
ॐ चुं चण्डीश्वराय तेजस्याय चुं ॐ फट्
मनोजवम् मारुततुल्यवेगम् जितेन्द्रियम् बुद्धिमताम् वरिष्ठम्। वातात्मजम् वानरयूथमुख्यम् श्रीरामदूतम् शरणम् प्रपद्ये॥