शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ अनङ्गमञ्जरीभग्नायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसहस्रनाम जप मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
(अनंग मंजरी स्वरूपा) जो प्रेम-मंजरी हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
शुद्ध प्रेम का जागरण
विस्तृत लाभ
शुद्ध प्रेम का जागरण।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सत्यवाचे नमः
जिन्होंने संपूर्ण पृथ्वी को जीतकर अश्वमेध यज्ञ में महर्षि कश्यप को दान कर दिया, उन पृथ्वी-पति को नमस्कार। (लाभ: संपत्ति एवं राज्याधिकार की प्राप्ति) 19।
ॐ निरायाय नमः।
ॐ गुरुजी को आदेश गुरुजी को प्रणाम, धरती माता धरती पिता, धरती धरे ना धीर बाजे श्रृंगी बाजे तुरतुरी आया गोरखनाथ मीन का पूत मुंज का छड़ा लोहे का कड़ा हमारी पीठ पीछे यती हनुमंत खड़ा, शब्द सांचा पिंड काचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।
ॐ वेदगर्भाय नमः
ॐ करमालासमागमायै नमः