शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ दुर्गापद्विनिवारिण्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनामावली मंत्र | जप समय: प्रातः या घोर संकट काल |
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो दुर्गम आपत्तियों और संकटों का पूर्णतः निवारण करती हैं।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ क्षेत्रज्ञाय नमः
ॐ क्रीडामनुजबालकाय नमः
तप्तकाञ्चन संकाशश्चाष्टहस्तो महातनुः । दीप्ताङ्कुशं शरं चाक्षं दन्तं दक्षे वहन् करैः ॥ वामे पाशं कार्मुकं च लतां जम्बू दधत् करैः । रक्तांशुकः सदा भूयाद् दुर्गागणपतिर्मुदे ॥
अशोकवृक्षवल्लरीवितानमण्डपस्थिते प्रवालबालपल्लवप्रभारुणाङ्घ्रिकोमले। वराभयस्फुरत्करे प्रभूतसम्पदालये कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ क्रौञ्चदारणाय नमः
ॐ ज्योतिष्मत्यै नमः