शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ दुर्गार्तिशमन्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनामावली मंत्र | जप समय: प्रातः या घोर संकट काल |
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो दुर्गम पीड़ाओं और दुःखों को शांत करती हैं।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ स्वधायै नमः
ॐ गोपालाय नमः
अनेकमन्त्रनादमञ्जुनूपुरारवस्खलत्समाजराजहंसवंशणिक्वाणातिगौरवे। विलोलहेमवल्लरीविडम्बिवारुचङ्क्रमे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ क्ष्रौम् भगवते नरसिंहाय नमः
त्वं गुणत्रयातीतः ॥ त्वं देहत्रयातीतः ॥ त्वं कालत्रयातीतः ॥ त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम् ॥ त्वं शक्तित्रयात्मकः ॥ त्वां योगिनो ध्यायन्ति नित्यम् ॥
ॐ सर्वज्ञाय नमः।