शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ शत्रुदर्पघ्नाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपगर्व-नाशक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो बड़े-बड़े अंहकारी क्षत्रिय राजाओं का गर्व चूर कर देते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अहंकार नाश
विस्तृत लाभ
अहंकार नाश
जप काल
विवाद के समय
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
तस्य सर्वार्थसिद्धिः स्याद्वाक्सामर्थ्यं तथा लभेत्। ऐश्वर्यं च लभेत्साक्षाद्दृशा पश्यति राधिकाम्॥
ॐ वागधिष्ठातृदेव्यै सर्वाङ्गं मे सदाऽवतु। (स्वरूप: वागधिष्ठात्री | लाभ: संपूर्ण शरीर की आध्यात्मिक और भौतिक रक्षा | अर्थ: वाक् की अधिष्ठात्री देवी मेरे संपूर्ण अंगों की रक्षा करें) 8
ॐ सुवर्णदृष्ट्यै नमः
ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्णदंष्ट्राय धीमहि। तन्नो नारसिंहः प्रचोदयात्॥
ॐ गिरिधन्वने नमः
ॐ प्रतापवते नमः