शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ कालनेमिप्रमथनाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपकालनेमि-नाशक
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
संजीवनी लाते समय मायावी कालनेमि राक्षस का वध करने वाले को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
वृत्तोत्फुल्लविशालाक्षं विपक्षक्षयदीक्षितम्। निनादत्रस्तविश्वाण्डं विष्णुमुग्रं नमाम्यहम्॥
ॐ कामिने नमः
राधे कृष्ण राधे कृष्ण कृष्ण कृष्ण राधे राधे। राधे श्याम राधे श्याम श्याम श्याम राधे राधे॥
ॐ कृताकृताय नमः
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
ॐ पद्मनाभप्रियायै नमः