शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ महाबलपराक्रमाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपमहा-पराक्रमी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
महान बल और अतुलनीय पराक्रम के स्वामी को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे। नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले॥
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे। सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ 17
ॐ ह्रीं वाग्वादिन्यै स्वाहा नासां मे सर्वतोऽवतु। (स्वरूप: वाग्वादिनी | लाभ: प्राण-वायु और नासिका की रक्षा | अर्थ: वाग्वादिनी नासिका की सभी प्रकार से रक्षा करें) 8
ॐ क्लीं कृष्णाय नमः
ॐ विराधवधपण्डिताय नमः
ॐ कोटिसूर्यसमप्रभाय नमः