शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ महोग्रः पूर्वतः पातु महावीराग्रजोऽग्नितः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
स्वरूपपूर्व व आग्नेय दिशा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
महोग्र रूप पूर्व दिशा से और महान वीरों के अग्रज आग्नेय कोण से मेरी रक्षा करें। (दिशा-दोष निवारण) 38।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वामनप्रियाय नमः
आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्। जयावहं जपेन्नित्यमक्षय्यं परमं शिवम्॥
ॐ पवित्राय नमः
ॐ प्राणशक्त्यै नमः
श्रीमत्तीक्ष्ण शिखाङ्कुशाक्षवरदान् दक्षे दधानः करैः पञ्चामृतपूर्णकुम्भमभयं वामे दधानो मुदा । पीठ स्वर्णमयारविन्दविलसत् सत्कर्णिका भासुरे आसीनस्त्रिमुखः पलाशरुचिरो नागाननः पातु नः ॥
ॐ दक्षाध्वरहराय नमः