शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ रविचन्द्राग्निलोचनाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपत्रिनेत्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सूर्य, चंद्र और अग्नि रूपी नेत्र वाले भगवान को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
भूत, वर्तमान और भविष्य को देखने की सूक्ष्म दृष्टि
विस्तृत लाभ
भूत, वर्तमान और भविष्य को देखने की सूक्ष्म दृष्टि।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
काली कराली च मनोजवा च सुलोहिता या च सुधूम्रवर्णा। स्फुलिङ्गिनी विश्वरुची च देवी लेलायमाना इति सप्त जिह्वाः॥
ॐ वैकुण्ठाय नमः
ॐ कामाद्याय नमः
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ 17
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये नवग्रहाः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ अजराय नमः