शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
शरणागति और रक्षा मंत्र
श्री राधे शरणं मम
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारकृपा-प्राप्ति एवं रक्षा मंत्र
स्वरूपकिशोरी जी / गुंडिचा स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे श्री राधे! आप ही मेरी एकमात्र शरण हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
जीवन के तापों और क्लेशों से मुक्ति, साधक की मासूमियत और पवित्रता की रक्षा
विस्तृत लाभ
जीवन के तापों और क्लेशों से मुक्ति, साधक की मासूमियत और पवित्रता की रक्षा 24।
जप काल
विपत्ति काल, मानसिक अशांति के समय, या निरंतर श्वास-प्रश्वास के साथ।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
पक्वचूत फलकल्प मञ्जरीमिक्षुदण्ड तिलमोदकैः सह । उद्वहन् परशु हस्त ते नमः श्रीसमृद्धिपतये देव पिङ्गल ॥
ॐ पद्महस्तायै नमः
ॐ आनन्दाय नमः
ॐ आञ्जनेयाय विद्महे वायुपुत्राय धीमहि। तन्नो हनुमत् प्रचोदयात्॥
ॐ श्रीं ह्रीं पातु मे ग्रीवां स्कन्धं मे श्रीं सदाऽवतु। (स्वरूप: श्रीं ह्रीं स्वरूपा | लाभ: गर्दन और कंधों की रक्षा | अर्थ: देवी मेरी ग्रीवा और स्कंध की रक्षा करें) 8
ॐ अम्बिकानाथाय नमः