परशुराम मंत्र
त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे देवों के देव! आप ही मेरी माता, पिता, बंधु, सखा, विद्या और धन हैं; आप ही मेरे सर्वस्व हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
भगवान के प्रति पूर्ण शरणागति और सांसारिक संबंधों की आसक्ति से मुक्ति
विस्तृत लाभ
भगवान के प्रति पूर्ण शरणागति और सांसारिक संबंधों की आसक्ति से मुक्ति 10।
जप काल
पूजा या आरती के अंत में समर्पण भाव से।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ नमः कालाय काल द्रष्ट्राय कराल वदनाय च
कामदेवाय सर्वजनप्रियाय सर्वजनसम्मोहनाय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल सर्वजनस्य हृदयं मे वशं कुरु कुरु स्वाहा ॥
ॐ कर्पूरसागरालयायै नमः
ॐ पञ्चवक्त्राय नमः
ॐ पद्मासने शब्दरूपे ऐं ह्रीं क्लीं वद वद वाग्वादिनी स्वाहा।
ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा । भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः ॥ स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवांसस्तनूभिः । व्यशेम देवहितं यदायुः ॥