शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ वज्रहस्तसुतावल्लीवामदक्षिणसेविताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपपूर्ण-परिवार
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनके वाम-दक्षिण भाग में देवसेना और वल्ली विराजमान हैं, उन्हें नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
पारिवारिक अखंडता और संबंधों में प्रगाढ़ता
विस्तृत लाभ
पारिवारिक अखंडता और संबंधों में प्रगाढ़ता।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
उपस्पृश्य महेन्द्राद्रौ रामं दृष्ट्वाभिवाद्य च।
कल्हारांबुज बीजपूरक गदा दन्तेक्षु बाणैः सदा बिभ्राणो मणिकुम्भ शालिकलशौ पाशं च चक्रान्वितम् । गौराङ्ग्या रुचिराविन्दकरया देव्या सदा संयुतः शोणाङ्कुश शुभमातनोतु भजतामुद्दण्डविघ्नेश्वरः ॥
नमो रुद्रायातताविने क्षेत्राणां पतये नमः।
ऐं ह्रीं श्रीं क्रौं हौं ह्रूं क्षूं लाट भैरवाय क्षूं ह्रूं हौं क्रौं श्रीं ह्रीं ऐं नमः।
ॐ शौरये नमः
ॐ प्राणाय नमः