शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम मंत्र
ॐ यशस्कर्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपयशस्करी
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अकलंक यश और कीर्ति का चारों दिशाओं में फैलना
विस्तृत लाभ
अकलंक यश और कीर्ति का चारों दिशाओं में फैलना
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि। सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
ॐ विश्वम्भराय नमः
ॐ कामनाथाय नमः
सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते ॥ सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति ॥ त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभः ॥ त्वं चत्वारि वाक्पदानि ॥
ॐ श्रीमते नमः
ॐ जनार्दनाय नमः