शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ अच्युताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो अपने स्वरूप से कभी गिरते (च्युत) नहीं
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
प्राप्त पद, धन और प्रतिष्ठा की स्थिरता
विस्तृत लाभ
प्राप्त पद, धन और प्रतिष्ठा की स्थिरता 19
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
वीणां कल्पलतां अरिं च वरदं दक्षे विदत्ते करैः वामे तामरसं च रत्नकलशं सन्मञ्जरीं चाभयम् । शुण्डादण्ड लसन्मृगेन्द्रवदनः शङ्खेन्दुगौरः शुभो दीव्यद्रत्ननिभांशुकः गणपतिः पायादपायात्स नः ॥
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य। प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥ 18
ॐ परब्रह्मणे नमः
ॐ अजामलवद्धाय नमः।
ॐ कुलीनार्तिनाशिन्यै नमः
शरजन्मा गणाधीश पूर्वजो मुक्तिमार्गकृत् । सर्वागमप्रणेता च वाञ्छितार्थप्रदर्शनः ॥