शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
देवी सूक्त मंत्र - 8
अहमेव वात इव प्र वाम्यारभमाणा भुवनानि विश्वा। परो दिवा पर एना पृथिव्यैतावती महिना सम्बभूव॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवैदिक मंत्र |
स्वरूपमहाशक्ति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सम्पूर्ण लोकों का निर्माण करती हुई मैं वायु के समान स्वतंत्र रूप से प्रवाहित होती हूँ। मैं अपनी महिमा से द्युलोक और इस पृथ्वी के भी परे अनंत विस्तार वाली हूँ 1।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
परम शांति और मोक्ष की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
परम शांति और मोक्ष की प्राप्ति।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये देवासुरमनुष्यबोधः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ कलनादनिनादिन्यै नमः
ॐ भूतकृते नमः
ॐ ह्रीं वाग्वादिन्यै स्वाहा नासां मे सर्वतोऽवतु। (स्वरूप: वाग्वादिनी | लाभ: प्राण-वायु और नासिका की रक्षा | अर्थ: वाग्वादिनी नासिका की सभी प्रकार से रक्षा करें) 8
ॐ सिद्धयै नमः
ॐ सर्वरूपाय नमः