कुमार सूक्त मंत्र 1
अस्य घा वीर ईवतोऽग्नेरीशीत मर्त्यः । तिग्मजम्भस्य मीळ्हुषः ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जो उपासक यज्ञ में प्रयत्नशील है, वह तीक्ष्ण रश्मियों वाले इस अग्नि (कुमार) की कृपा प्राप्त करे।
इस मंत्र से क्या होगा?
आध्यात्मिक शक्ति और अभीष्ट की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
आध्यात्मिक शक्ति और अभीष्ट की प्राप्ति।
जप काल
यज्ञ के समय वैदिक सस्वर पाठ।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-वीर-वीराय सर्वदुःख निवारणाय ग्रहमण्डल सर्वभूतमण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर एकाहिक-ज्वर द्वयाहिक-ज्वर त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर संताप-ज्वर विषम-ज्वर ताप-ज्वर माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्मराक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा।
ॐ यज्ञपालाय नमः
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं गज लक्ष्म्यै नमः।
पाशाङ्कुशापूप कुठारदन्तं चञ्चत्करकॢप्त वराङ्गुलीयकम् । पीतप्रभं कल्पतरोरधस्थं भजामि नृत्तोपपदं गणेशम् ॥
ॐ करवालप्रहृष्टात्मायै नमः
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणतक्लेशनाशाय