शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राधा मंत्र
ॐ हृदयं विजया तथा।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकाररक्षा कवच मंत्र;
स्वरूपविजया
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
विजया सखी मेरे हृदय की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंग: हृदय (छाती) की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: हृदय (छाती) की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
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ॐ सरस्वत्यै स्वाहेति श्रोत्रं पातु निरन्तरम्। (स्वरूप: सरस्वती | लाभ: कानों, श्रवण-शक्ति व नाद-ग्रहण की रक्षा | अर्थ: सरस्वती मेरे कानों की निरंतर रक्षा करें) 8
ॐ ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नमः।
ॐ अमृत्यवे नमः
ॐ भक्तवत्सलाय नमः
तव करकमलवरे नखमद्भुतशृंगं दलितहिरण्यकशिपुतनुभृंगम्। केशव धृतनरहरिरूप जय जगदीश हरे॥
ॐ भद्राय नमः