शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
अरुणा शक्ति मंत्र
ज्मह्रीं (Jmhrīm)
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारतांत्रिक बीज मंत्र
स्वरूपअरुणा शक्ति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अरुण वर्णीय शक्तिमयी देवी को प्रणाम।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आध्यात्मिक तेज, ओज और तेजस्विता की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
आध्यात्मिक तेज, ओज और तेजस्विता की प्राप्ति।
जप काल
प्रातःकालीन न्यास साधना।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रीं क्लीं वाण्यै स्वाहेति मम पृष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: वाणी | लाभ: पीठ और मेरुदंड की रक्षा | अर्थ: वाणी मेरी पीठ की सदा रक्षा करें) 8
ॐ जृम्भणाय नमः।
ॐ द्विवर्णाय नमः
विष्णुप्रिये! रत्नगर्भे! समस्तफलदे शिवे! त्वद्गर्भगतहेमादीन् सम्प्रदर्शय दर्शय॥
अहं रुद्राय धनुरातनोमि ब्रह्मद्विषे शरवे हन्तवा उ। अहं जनाय समदं कृणोम्यहं द्यावापृथिवी आ विवेश॥
ॐ करुणामृतसागरायै नमः